Saturday, October 28, 2017

एकाकीपन (कविता)

अनंत संवेदनाओ से भरे
एकाकीपन के बादल
आंखों के पोर की
गहराई नाप लेने को
है आतुर ।
समर्पण की त्रासदी को झेल
बेकसूर आदमी के
हलफनामे की तरह
अति विश्वास की तहरीर
बांच लेना चाहते है
पथराये नयन ,
न्यायाधीश बना मन
मानने को तैयार नही
कोई दलील ।
सजा भुगतने को विवश
निर्दोष और निश्छल हृदय
अनचाही कैद में
हो जाना चाहता है कैद ,
फिर से अलगांव की
आग में झुलस
स्मृति के खंडहरों में
गुम हो जाने के लिए ।
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अनिल जैन उपहार

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