काव्यांजलि
Friday, August 26, 2022
मुक्तक।।।बुजुर्गो की दुआओं का
समंदर गम का गहरा था किनारा मिल गया मुझको।
राह दुर्गम थी अंधियारी सितारा मिल गया मुझको।
ये मेरी खुश नसीबी थी मैं तन्हा हो नही पाया,
बुजुर्गों की दुआओं का सहारा मिल गया मुझको ।
----------अनिल उपहार ------
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