काव्यांजलि
Monday, December 19, 2022
मुक्तक
मेरे जीवन के सभी रंग तुमसे निखरे है।
मेरी कविता के हरेक छंद पाक मिसरे है।
तेरी यादों के हिमाले से दमकते मोती
गंध बन कर के आज फिर फिज़ा में बिखरे है।
डा अनिल जैन उपहार
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