Wednesday, December 28, 2022

मुक्तक

सूरज थक कर सो गया ,पंछी लौटे गाँव 

दंश लगी देने हमें ,स्मृतियों की छाँव ।

शारदीय मधु चन्द्रिका ,सनी प्रेम रस रात

सहज छुअन से खिल उठा ,गौरी का मृदु गात।

---------अनिल उपहार ------

No comments:

Post a Comment