Wednesday, June 28, 2023

वक्त की बैसाखी(कविता)

वक़्त की बैसाखी पर 
दूसरों का सहारा बन
गुमनाम रास्तों पर 
भटकते भटकते ,
अचानक आई आंधी 
और तेरे होसलों की 
उडान ने ,दिया था 
संबल ।
तेरी यादो की बारिश 
और गेसुओ की महक
दे गयी प्रतीक्षा की 
कभी न खत्म होने वाली 
श्रंखला ।
मै आज भी उसी दौराहे पर 
अपलक निहार रहा हूँ 
तेरी बाट ।
और तुम ये सब देखते ।
काश !तुम यहाँ होते ।

-------अनिल उपहार -------

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