काव्यांजलि
Friday, June 23, 2023
हसीन किताब(मुक्तक)
उलझे हुए सवालों के जवाब देगया ।
गुज़रे हुए पलों का सब हिसाब देगया ।
महंदी की पत्तियाँ रखी उसने हथेली पर
उम्मीदों की हसीन इक किताब देगया ।
------**-----@अनिल उपहार -----
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