काव्यांजलि
Sunday, June 16, 2024
लहज़ा
यूं तो रिश्तों को निभाने का हुनर आता है ।
हरेक लहजे में बस तू ही तू नजर आता है।
जिसे छू कर के मेरी रूह महक जाया करती ,
तेरी बातों में वो लहज़ा वो असर आता है ।
डा अनिल जैन उपहार
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