Monday, September 2, 2024

प्रीत का दामन(मुक्तक)

दसों दिशाएं अभिभूत हो दुलराती है नेह का आंगन।

जाने किसने लिखी भूमिका आंखों में आ उतरा सावन।

पूर्वाग्रह की तेज हवाएं आंखों में नश्तर सी चुभती,

कौन भंवर में उलझ गए तुम छोड़ गए वो प्रीत का दामन।

डा अनिल जैन उपहार

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