काव्यांजलि
Wednesday, September 25, 2024
मुक्तक(कालिमा नयन की)
जब नयन की कालिमा पर गीत कोई ढल उठे।
गेसुओ की स्निग्धता पर छंद मंडित हो उठे।
उस मिलन को आखरी अनुबंध में अपने पिरोना।
तृप्ति से कुछ पल चुरा कर अश्रु जल से फिर भिगोना।
डा अनिल जैन उपहार
@highlight
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment