Friday, July 17, 2026

मुक्तक वागचुग जी को समर्पित

किसे पड़ी है, कौन सुनेगा व्यथा आज यह आपकी,
संवेदनहीन हुई सत्ता, न पीड़ा समझे आपकी।
सब सुविधाओं के दास यहाँ, झूठी हामी भरते हैं,
भाड़ में जाए देश भले, कौन फ़रियाद सुनेगा आपकी।
— डॉ. अनिल उपहार

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