Tuesday, February 4, 2014

------मुक्तक ------
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समन्दर  गम  का  गहरा  था  किनारा  मिल  गया  मुझको |

राह  दुर्गम  थी  अंधियारी  सितारा  मिल गया  मुझको  | 

ज़माने  भर  की खुशियों  से  नवाज़ा  इस तरह  उसने  |

बुजुर्गो  की  दुआओं का  सहारा  मिल  गया  मुझको  |

------------------ -------अनिल उपहार ----------------

1 comment:

  1. ज़माने भर की खुशियों से नवाज़ा इस तरह उसने |
    बुजुर्गो की दुआओं का सहारा मिल गया मुझको |

    बहुत ही शानदार प्रस्तुति। मेरे ने पोस्ट सपनों की भी उम्र होती है DREAMS ALSO HAVE LIFE. पर आपका इंतजार रहेगा।

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