बनके नगमा कोई मीठा सा संवर जाए हम ।
हार कर दिल की हुकूमत और निखर जाए हम ।
दूर तक पसरा जो सन्नाटा आओ कम कर दें
भीगें अहसास की बारिश में बिखर जाए हम ।
अनिल जैन उपहार
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