Monday, July 24, 2017

सच्चाई(कविता)

ये जो तुम्हारे सख्त लहज़े की
तहरीर  है न
बड़ा नर्म अहसास
कराती है
पथराई आंखों को ।
शायद इन्ही में गुम तो
नहीं
हौसलो के पर
जो खींच लाये है
तुम्हे धरती से
आसमा पर ।

अनिल जैन उपहार

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