स्मृति के खंडबिम्ब और कौंधते शब्द नित देते मेरी सर्जना को संदर्भ । ठीक उसी तरह सावन की पहली बून्द ने लिख दिया था मिलन के पृष्ठ पर अलसायी सुबह का सच । गवाह है वो हस्ताक्षर जो आज भी दर्ज़ है सुनहरी यादों के दस्तावेज पर ।
अनिल उपहार
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