काव्यांजलि
Sunday, July 2, 2023
मुक्तक(आमंत्रण)
शीतल शीतल मन्द फुहारेँ देती मौन निमँत्रण है ।
देख के सुध बुध भूल गया बेबस मन का दर्पण है ।
प्रीत की पायल खनक रही है ,कहती दिल की धडकन है ,
साँसोँ मेँ बस आकर बसजा ह्रदय का ये आमंत्रण है।
डॉ अनिल जैन उपहार
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