काव्यांजलि
Thursday, August 10, 2023
मन का पंखेरू(मुक्तक)
अहसासों के आसमान में मन का पखेरू डोल रहा ।
चप्पा चप्पा तेरी कहानी मधु के रस में घोल रहा ।
चंपा जूही और चमेली ने जूडे में फूल गूँथे ,
लगता है तेरे आने से मौसम भी घूँघट खोल रहा ।
---------अनिल उपहार --------
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