Sunday, December 10, 2023

कविता तमाशा

विपदाओं के गहन तल में
हर बार घिरता हुआ जीवन
तलाश ही लेता है 
उम्मीद का उजाला 
नही हारता यह मन 
थकने नही देती है 
जिजीविषा
चीथड़ों में से उघड़ती देह
ढंक लेती है पेट की गरीबी
उसे याद है बेबसी जमाने की
कुछ ही पलों में तोल दी जाएगी
 बदचलनी के तराजू में उसकी 
कोमल देह।।।।

डॉ अनिल जैन उपहार

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