Tuesday, December 19, 2023

गीत (प्रिय तुम्हारी सुधियों पर)

प्रिय तुम्हारी सुधियो पर मैने कितने गीत लिखे।

स्मृतियों के आंगन बैठे अक्षर अक्षर मीत लिखे।

अंतिम प्रहर रात सलोने सपनों ने सहलाया था।

बाहों के झूलों में कितनी देर रहा इठलाया था।

गेसु बंद कपाटो से खुलकर के यूं बोल गए।

कुंडल झूमे बोराए थे कानों मिश्री घोल गए ।

अधरो ने तृप्ति को छुकर नित नवीन अनुबंध लिखे।

प्रिय तुम्हारी सुधियों पर मैने कितने गीत लिखे।

डा अनिल जैन उपहार

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