मुक्तक
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मैं छंद बना और तू गीत होगई |
रिश्तों की नर्म डोर बंधी प्रीत होगई |
सन्दर्भ बदलता रहा रस्मों रिवाज़ का ,
मैं मीत बना और तू मन मीत होगई |
------------अनिल उपहार ------------
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मैं छंद बना और तू गीत होगई |
रिश्तों की नर्म डोर बंधी प्रीत होगई |
सन्दर्भ बदलता रहा रस्मों रिवाज़ का ,
मैं मीत बना और तू मन मीत होगई |
------------अनिल उपहार ------------
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