--- कविता ---
---------------
मैं नहीं जानता
विचारों की गहराई,
असीमित भावों का
विशाल शब्द कोश |
पर हाँ,
इतना अहसास आज भी
जिन्दा है
अंतर मन में कहीं |
कविता,
अभिव्यक्ति के उच्छ्रंखल आँगन
में
नहीं खेलती |
वो पल पल निखरती है
शब्दों के सागर में,
संवरती है तहज़ीब के लहज़े में,
बस् सिखाती है
भाषा में आदमी होने की तमीज़ |
----अनिल उपहार ---
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मैं नहीं जानता
विचारों की गहराई,
असीमित भावों का
विशाल शब्द कोश |
पर हाँ,
इतना अहसास आज भी
जिन्दा है
अंतर मन में कहीं |
कविता,
अभिव्यक्ति के उच्छ्रंखल आँगन
में
नहीं खेलती |
वो पल पल निखरती है
शब्दों के सागर में,
संवरती है तहज़ीब के लहज़े में,
बस् सिखाती है
भाषा में आदमी होने की तमीज़ |
----अनिल उपहार ---
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