काव्यांजलि
Wednesday, January 29, 2014
------मुक्तक------
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दर्द में जब से संवरना सीख लिया |
शब्दों ने कागज़ पर उतरना सीख लिया |
खुद ही हाथों से कलम कैसे छीन लेता में,
हरेक अदावत पर मोहब्बत ने निखरना सीख लिया |
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अनिल उपहार -----------
1 comment:
काव्यांजलि
January 31, 2014 at 10:15 AM
कविता मेरे लिए पाठकों से सीधा संवाद है
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कविता मेरे लिए पाठकों से सीधा संवाद है
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