Wednesday, February 24, 2016

मुक्तक

[10:35AM, 17/11/2015] aniluphar123: चेतना के गीत गाने से कभी डरता नही हूँ ।

हार कर दिल की हुकूमत नेह में करता नही हूँ ।

हो सियासी दाव कैसे भी मगर हारा नही मैं ।

जिंदगी पर मौत के मैं दस्तखत करता नही हूँ ।

---------अनिल उपहार -----
[2:59PM, 18/11/2015] aniluphar123: वफ़ा की राह में कमसिन कहानी कौन रखता है ।

बचा के शान से अपनी जवानी कौन रखता है ।

नही मेरी वफाओ को कभी इलज़ाम तुम देते

दिलों में प्यार की कोई निशानी कौन रखता है ।

------अनिल उपहार
[10:42AM, 19/11/2015] aniluphar123: गीत फिर से प्यार का तू गुन गुनाकर देख ले ।

मीत रूठा है उसे फिर से मनाकर देख ले ।

जीत हो या हार हो सब पूण्य की ही बात है

तू किसी के दर्द को अपना बनाकर देख ले ।

---------अनिल उपहार
[1:19PM, 20/11/2015] aniluphar123: यहाँ कोई नही अपना न अब तक मान पाया मैं ।

वफ़ा तो पाक होती है कहाँ पहचान पाया मैं ।

किसी की आँख से आंसू चुरा पलकों पे रख लेना

मुहोब्बत किसको कहते है उसी दिन जान पाया मैं ।

------;अनिल उपहार
[12:47PM, 25/11/2015] aniluphar123: बीज नफरत के अब बो रहा आदमी

लाश खुद की यहाँ ढो रहा आदमी ।

जानकर भी जो अनजान है इस कदर

भीड़ की भीड़ में खो रहा आदमी ।

------अनिल उपहार
[1:28PM, 03/12/2015] aniluphar123: किये तुमसे जो वादे थे उन्हें बस तोड़ आये है ।

बिना बैसाखी के पीछे तेरे हम दौड़ आये है ।

वफ़ा की राह में कंकर मिले या फिर मिले कांटे

किसी के दर पे दिल की हर तमन्ना छोड़ आये है ।

--------अनिल उपहार
[12:12PM, 07/12/2015] aniluphar123: खुदा के वास्ते उसको मेरा दिलदार लिख देना ।

यही है आरज़ू दिल की हंसी संसार लिख देना ।

सुनो शिल्पी तराशा तुमने देकर चोट पत्थर को

कभी तुम प्रीत लिख देना कभी मनुहार लिख देना ।

---------अनिल उपहार
[10:01AM, 09/12/2015] aniluphar123: भावनाओं के सेतु से तुम्हारा
बैखोफ गुज़र जाना ।
और कदम दर कदम
छोड़ जाना ऐसे निशां
जिन पर लिखे को
कोई बांच नही सकता ।
नफरत की अंधी खाई को
कोई पाट नही सकता ।

शायद ये फितरत नही तुम्हारी
सिर्फ फ़िज़ा में छाया वो धुंवा है
जो देखने नही देता
तुम्हारी आँखों कों
रिश्तों की सच्चाई ।

तभी तो उतर आते है
इन आँखों में संशय के ज्वार ।
और लगा देते है
अपनी परम्परागत मुहर
पराये को पराया समझते रहने की ।

---;;;;अनिल उपहार
[9:35AM, 12/12/2015] aniluphar123: रूप की धूप में वो जलाने लगे ।

गीत फिर से लबों पर सजाने लगे ।

राज़ उनसे वफ़ा का लगे जानने

छोड़ कर वो हमे दूर जाने लगे ।

------अनिल उपहार
[6:22PM, 30/12/2015] aniluphar123: मचलती हसरतों कों दे नयी रस्मो अदाई हम ।

उखड़ती साँस कों दे फिर से जीवन की दुहाई हम ।

तमस कों हारना होगा यहाँ अब तो उजालो से

गुजरते साल कों दें भावभीनी अब विदाई हम ।

-------;-अनिल उपहार ---;;;
[2:18PM, 31/12/2015] aniluphar123: गुज़र गया सो गुज़र गया मत मारो उसकों ताने ।

भोर खड़ी है दरवाज़े पर मंगलाचार नूतन गाने ।

नये वर्ष की अगवानी में बस रहे हर्ष उत्कर्ष

नेह भरे घट अब ना रीते स्वागत है नव वर्ष ।।

-------अनिल उपहार -----
[3:56PM, 02/01/2016] aniluphar123: नये साल की हार्दिक शुभ कामनाये ।
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नयी भौर के आँगन गूंजे मंगल मंगलाचार ।

सूरज ने भी आकर बांधी स्वर्णिम वंदनवार ।

जूही ने गज़रा क्या गूंथा महक उठी गलमाल

साल सोलहवा लगा सखी क्यों न करूँ श्रृंगार ।

------//@अनिल उपहार ---
[1:53PM, 03/01/2016] aniluphar123: दर्द लिख कर उम्र भर की दासता ढोते रहे ।

एक अदद मुस्कान कों पहचान वो खोते रहे ।

अपने हिस्से की ख़ुशी भी रास न आई जिन्हें

शब्द के फनकार कवि भी प्यार कर रोते रहे ।

------अनिल उपहार
[12:06PM, 06/01/2016] aniluphar123: पठान कोट एयरबेस घटना पर ।

मिलाओ हाथ कितने भी लगाओ या गले उनको ।

दिए जो ज़ख्म उसने फिर भुलादो तुम भले उनको ।

शहीदों की शहादत कह रही है अश्क भर तुमसे

कि छप्पन इंची सीने का दिखादो दम ज़रा उनको ।

-----अनिल उपहार
[9:05PM, 07/01/2016] aniluphar123: अगर था फासला नजदीकियां सच हम बढ़ाएंगे ।

गगन के चाँद सूरज क्या सितारे तोड़ लाएंगे ।

तराने प्यार के अपने ज़माना गुन गुनायेगा

कसम है सात फेरों की वफ़ा तुमसे निभाएंगे ।

-----अनिल उपहार
[11:41AM, 08/01/2016] aniluphar123: छंद कविता गीत की पहचान हो ।

शब्दावली हो प्रीत की यशगान हो ।

मैं भले ही कह नहीं पाया ज़ुबाँ से

मैं ग़ज़ल हूँ मीत तुम अरकान हो ।

---;;;अनिल उपहार ------;;;;
[3:43PM, 13/01/2016] aniluphar123: मेरा मोल लगा बैठे ऐसी उनकी औकात नही ।

स्वाभिमान गिरवी रख दूँ मैं ऐसे भी हालात नही ।

मैंने तो बस वो लिक्खा है जिसे ह्रदय ने पढ़ा गौर से

बीच सड़क पर जो बिक जाये मेरे वो जज़्बात नही ।

------अनिल उपहार
[12:03PM, 14/01/2016] aniluphar123: वेदिक ऋचाओं सा सुरीला गान बेटियां

मंदिर की आरती भी है अज़ान बेटियां
श्लोक की तरह इन्हें गुन गुनाइये

गीता है बाइबिल है और कुरआन बेटिया ।

-----अनिल उपहार
[12:00PM, 18/01/2016] aniluphar123: अंतस की इस ऊहा पोह में कैसे दस्तक द्वार लगाऊँ ।

रूठ गयी अब मन की देहरी कैसे वंदनवार सजाऊँ ।

समृति के अलसाये पन्ने और व्याकरण भी गहरा है

शब्दकोष भी विवश लगता अब कैसे प्रतिमान जुटाउँ ।

--------अनिल उपहार -----
[10:38PM, 02/02/2016] aniluphar123: ज़माने भर की बातों को न यूँ दिल से लगाओ तुम ।

लिखे जो प्रेम के आखर पढ़ो सबको पढ़ाओ तुम ।

हुआ जब भी दखल गैरो का तो परिवार टूटे है

पढ़ा दो प्रेम की भाषा न नज़रो से गिराओ तुम ।

------अनिल उपहार
[9:38AM, 09/02/2016] aniluphar123: तुम्हारी हर अदा लगती भला अब चॉकलेटी है ।

तेरी हर बात मिश्री की डाली सच चॉकलेटी है ।

चलन रिश्ते निभाने का सलीका क्या गजब तेरा

तेरी हर इक छुअन लगती यहाँ अब चॉकलेटी है ।

-----अनिल उपहार---
[12:24PM, 12/02/2016] aniluphar123: ओ वीणापाणी आज ह्रदय के तारों को झंकृत कर दो ।

बैठो जीभ की जाजम पर हर इक शब्द अलंकृत कर दो ।

दौलत और ये शौहरत तो बस तेरी आज बदौलत है ।

मेरे गीत ग़ज़ल छंदों को आओ आज परिष्कृत कर दो ।

अनिल उपहार ।।।।


चेन्नई की लाजवाब टीम