Saturday, July 20, 2024

गीतिका तुम बिन

तुम बिन,,,,,,,,
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बहुत बेदर्द आँखें है बड़े बेजार मंजर है ।           

मेरी पलकों के पीछे पलरहे लाखों समंदर है ।   
                                                                         
         ज़रा ठहरो मेरी सुनलो कि 

 तुम बिन जी नही सकते ।

            अश्कों के समंदर को 
                                                                  

        तन्हा पी नहीं सकते

तो आजाओ मुझे आजाद करदो अपनी चाहत से 

सिहर उठता है मन दरवाजे की हल्की सी आहट से 

बहुत से कारवां आते हे लेकिन तुम नही आते 

तुम्हारे बिन ये सावन के हमे झूले नही भाते ।

अभी भी वक्त है आओ लिखो अधरों पे सावन तुम 

करदो तन मेरा चन्दन ज़रा होले से छूकर तुम ।

----------------अनिल उपहार ------

यादगार कार्यक्रम

सारगर्भित आत्मीय उदबोधन माननीय मुख्यमंत्री महोदया का।

अदभुत कार्यक्रम शानदार आत्मीयता मैडम की।

मंच संचालन की तारीफ करती आदरणीया मुख्यमंत्री महोदया

वसुंधरा राजे जी के साथ

पूर्व मुख्यमंत्री महोदया के साथ ।मंच संचालक की भूमिका में।सेटेलाइट अस्पताल झालरापाटन का सम्मान समारोह।।।।

पिताजी के साथ एक यादगार पल