Sunday, December 31, 2023

नूतन वर्ष मनाए

समृद्धि के अक्षत ले, किरण भोर को अर्घ्य चढ़ाए।

उम्मीदों के दीप सजाकर ,मन देहरी को तिलक लगाए।

द्वार द्वार बस्ती बस्ती में करुणा की ही अलख जगे,

आओ हम तुम मिल जुलकर ऐसे नूतन वर्ष मनाए।

डा अनिल जैन उपहार

Friday, December 29, 2023

दोहावली

गुलमोहर भी मोन है,तुलसी भई उदास।

अब तो उगने लग गए कैक्टस घर के पास।

अपनी अपनी उंगलियां अपने अपने राग।

हंस देखते रह गए मोती चुग गए काग।

बूढ़ी आंखे ताकती वृद्धा श्रम दिन रात

छोड़ा बेटों ने सभी,मां का पावन साथ।

डा अनिल जैन उपहार

Thursday, December 28, 2023

मुक्तक(आंखों ही आंखों)

होले होले कानों में रस घोल गया।

बिन बोले ही मन के तराजू तोल गया।

उसकी सांसों की सरगम कुछ ऐसी थी,

आंखों हो आंखों में सब कुछ बोल गया।

 डॉ अनिल जैन उपहार

Tuesday, December 19, 2023

गीत (प्रिय तुम्हारी सुधियों पर)

प्रिय तुम्हारी सुधियो पर मैने कितने गीत लिखे।

स्मृतियों के आंगन बैठे अक्षर अक्षर मीत लिखे।

अंतिम प्रहर रात सलोने सपनों ने सहलाया था।

बाहों के झूलों में कितनी देर रहा इठलाया था।

गेसु बंद कपाटो से खुलकर के यूं बोल गए।

कुंडल झूमे बोराए थे कानों मिश्री घोल गए ।

अधरो ने तृप्ति को छुकर नित नवीन अनुबंध लिखे।

प्रिय तुम्हारी सुधियों पर मैने कितने गीत लिखे।

डा अनिल जैन उपहार

Saturday, December 16, 2023

मुक्तक(रूपसी)

दर्पण में क्या संवारा की दर्पण संवर गया।
अश्कों की झील में उतर अश्रु संवर गया।
वो धूप रूप की बदन को धन्य कर गई,
उतरी धरा पे धूप तो मौसम संवर गया।

डा अनिल जैन उपहार

Friday, December 15, 2023

मुक्तक (कामनाएं)

फिर मिलन की आस पाले सांस लेकर आ गई।
तृप्ति से अनुबंध लिख कर प्यास लेकर आ गई।
ये उदासी के भंवर रचते रहे नित साजिशे,
कामनाएं मन की सारी सन्यास लेकर आ गई।

डा अनिल जैन उपहार

Sunday, December 10, 2023

कविता तमाशा

विपदाओं के गहन तल में
हर बार घिरता हुआ जीवन
तलाश ही लेता है 
उम्मीद का उजाला 
नही हारता यह मन 
थकने नही देती है 
जिजीविषा
चीथड़ों में से उघड़ती देह
ढंक लेती है पेट की गरीबी
उसे याद है बेबसी जमाने की
कुछ ही पलों में तोल दी जाएगी
 बदचलनी के तराजू में उसकी 
कोमल देह।।।।

डॉ अनिल जैन उपहार

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Friday, December 8, 2023

मुक्तक (चलेंगे संग राहों मैं

कभी तन्हाई में जब गीत मेरे गुन गुनायेगा ।

पियेगा अश्क आँखों से नही उनकों बहायेगा ।

चलेंगे संग राहों में भले ही राह कैसी हो ,

बिना तेरे मुझे यारा ज़माना ये सतायेगा ।

-------अनिल उपहार -------