काव्यांजलि
Wednesday, June 28, 2023
मुक्तक(अहसास बन ढल जाना)
मै समर्पण लिखूं अहसास बन तू ढल जाना ।
दिल के सागर में तू दरिया सी बन मचल जाना ।
मेरी सांसों में समाया है तू धड़कन बन कर
चाहे बदले ये ज़माना न तुम बदल जाना ।
अनिल जैन उपहार@कॉपी राइट
फोटो जीवन साथी के साथ
संचालन पर सम्मान
मंडल विधान में मंगल कलश
वक्त की बैसाखी(कविता)
वक़्त की बैसाखी पर
दूसरों का सहारा बन
गुमनाम रास्तों पर
भटकते भटकते ,
अचानक आई आंधी
और तेरे होसलों की
उडान ने ,दिया था
संबल ।
तेरी यादो की बारिश
और गेसुओ की महक
दे गयी प्रतीक्षा की
कभी न खत्म होने वाली
श्रंखला ।
मै आज भी उसी दौराहे पर
अपलक निहार रहा हूँ
तेरी बाट ।
और तुम ये सब देखते ।
काश !तुम यहाँ होते ।
-------अनिल उपहार -------
Friday, June 23, 2023
हसीन किताब(मुक्तक)
उलझे हुए सवालों के जवाब देगया ।
गुज़रे हुए पलों का सब हिसाब देगया ।
महंदी की पत्तियाँ रखी उसने हथेली पर
उम्मीदों की हसीन इक किताब देगया ।
------**-----@अनिल उपहार -----
Sunday, June 18, 2023
पिता (मुक्तक)
अभावों के शीला लेख पर लिखी इबारत है पिता ।
दुर्दिनों के दौर में भी थपकी भरी हिदायत है पिता ।
तमाम उम्र तरसते रहै खुद छत के वास्ते ।
बच्चों के हौसलों की जियारत है पिता ।
,,,,,,,अनिल उपहार
Tuesday, June 13, 2023
दुआ (मुक्तक)
बुजुर्गो की दुआओं का मिला हर पल सहारा है।
मेरे हर दर्द को दिल से लगाया और दुलारा है।
प्रतिकूलताओं में कभी थक हार न जाऊं,
मेरी हर राह से कांटो को दे आशीष बुहारा है।
डॉ अनिल जैन उपहार
दुआ बुजुर्गो की
बुजुर्गो की दुआओ का मिला जब से ख़जाना है ।
नही है बात यह झूठी मगर किस्सा पुराना है ।
अँधेरी रात में तारे करे जब खुद ही अगवानी,
बड़ी शिद्दत से आधारों पर तराना ये सजाना है।
---------अनिल उपहार ------
मां हिन्दी(मुक्तक)
गरीबों की यह रोटी है अमीरों का निवाला है।
बन रसखान तुलसी सूर मीरा दिनकर निराला है।
रहे महलों में या हो झोपड़ी बेटों सा पाला है,
मां हिन्दी ने हम बेटों को दे आशीष ढाला है।
डा अनिल जैन उपहार
Monday, June 12, 2023
मुक्तक
भूख बेबसी लाचारी पर फिर कोई अफसाना लिख ।
मजलूमों की आँख से बहते पानी पर भी तराना लिख ।
अबला की चींखों पर तेरी आँखें गर नम होजाये तब,
बेशक फिर शफ्फाक बदन को तू दिल आशिकाना लिख ।
------अनिल उपहार --------
Thursday, June 1, 2023
मुक्तक 1जून23
किसी की आंख से आंसू गिरे गवारा नहीं।
थोथे शब्दों से किसी को कभी दुलारा नही।
मेरे किरदार ने मुझको फकत सिखाया यही,
जिंदगी बिन तेरे अब तो कोई सहारा नहीं।
डा अनिल जैन उपहार
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