Thursday, April 25, 2019

सच्चाई(रिश्तों की)

अहम और वहम के बीच टकराते,
संबंधों के
मायावी जाल,
और आधुनिकता की भेंट चढ़ते
अटूट रिश्ते,
रुग्ण होती मानसिकता
कितना पराया कर देती है
अपनों को अपनो से।
फिर भी सुकून की
बाट जोहता यह मन
अपनाने लगता है
आभासी दुनियां को,
किसी गहरे दर्द को
जी लेने की आस में ।
यही वक्त गर दिया होता
घर के बुजुर्गों को तो-
इंसान बनने की कवायद में
पराई संस्कृति को
ढोकना नही पड़ता ।

डॉ अनिल उपहार