गीत (श्रृंगार)
शब्द सारे आरती के ,गान में ही ढल गए ।
तुम मिले तो जिंदगी के ,मायने बदल गए ।
भावना ने कामना की ,अर्चना की इस तरह
मन की सूनी देहरी पे ,दीप सारे जल गए ।
(1)
वेदना की गोद पा के रचना यू संवर गयी ।
तृप्ति से अनुबंध हुआ अधरों पे निखर गयी ।
सपनों को पंख लगे , पंछी से उड़ गए
तुम मिले तो जिंदगी के मायने बदल गए ।
(2)
नेह निमंत्रण मिला ,जब हृदय की ओर से ।
मन की कलियां उमड़ पड़ी स्वागत में भोर के
वंदना को स्वर मिले ,साधना में ढल गए
तुम मिले तो जिंदगी के ,मायने बदल गए ।
(3)
बेड़ियां रवायतों की टूटकर बिखर गई ।
धड़कनों ने साज छेड़े , ज़िंदगी निखर गई ।
सांसों की उर्मियों में ,स्वप्न सारे पल गए
तुम मिले तो जिंदगी के ,मायने बदल गए ।
(4)
अर्घ समर्पण के चढ़े ,चाहत के थाल में ।
देह देवालय सा लगा, आस्था के काल मे ।
इक छुअन के वास्ते ,दो नयन मचल गए
तुम मिले तो जिंदगी के ,मायने बदल गए ।
अनिल उपहार