Friday, December 21, 2018

अखिल भारतीय कवि सम्मेलन प्रतापगढ़ सुहागपुरा

अखिल भारतीय लोक भाषा कवि सम्मेलन उज्जैन

अगवानी(कविता)

गुज़रे महीनों और
दिनों का
सारा लेखा जोखा
दर किनार करते है,
आओ फिर से समपर्ण
की स्याही से
संबंधों के शिलालेख पर
हस्ताक्षर करते है ।
और करते है अगवानी
नूतन वर्ष की ।
प्रश्न चिन्हों के अंतिम अर्घ्य से
विदाई इस गुज़रे साल की ।

अनिल जैन उपहार

Tuesday, December 4, 2018

नारी तुम सम्पूर्ण हो(कविता)

महानता का
बोझ
कभी लड़खड़ाने
नही देता ,
और न कभी होने देता है
अदना
शायद इन्हीं के बीच
तुमने सीख लिया है
अपनों के साथ
विलय होजाने की कला।
तभी तो देवत्व
तुम्हारे कदमो में नर्तन कर
तुम्हे और भी ऊँचा उठा देता है
मनुष्य बिरादरी
और उसकी मानसिकता से ,
सहजना और समेट लेना
सारा दर्द अपने भीतर
यही है खूबी नारी होने की ।
और हां सम्पूर्ण नारी
तुम्ही तो हो।।।।।।।

अनिल जैन उपहार

Saturday, November 24, 2018

झालावाड का शानदार कवि सम्मेलन 21/10/18

कोटड़ी का ऐतिहासिक कवि सम्मेलन 10/11/18

पयामे इंसानियत पिड़ावा

कविता(विवशता)

सूरज को चुरा लेने की
साजिश में ,
हर बार छला गया है
मन,
कम होने लगा है
ख्वाबों का वज़न ।
ग़मो का भारी होता पलड़ा
तोलना चाहता है
आंखों की नमी ।
धड़कने बांचने लगी है
माँ के आंचल की कथा ।
काश समझ पाते हम,
इन बरकतों के झरने की
झर झर,
और निकल पाते
मेहंदी की गंध से बाहर
उस बूढ़े बरगद की
छाँव तले
जीवन की पूर्णता को समेटे
सौंधी सी गन्ध लिये
लौट आते गाँव ।।।।।।।

अनिल जैन उपहार