Monday, May 21, 2018
Wednesday, May 9, 2018
कविता(अंतिम बात)
अंतिम बात
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माँ तूने तो हर बार
सबक सिखाया था यही
कि बड़ो की इज्ज़त करना ।
क्या किसी को बड़ा मानने की
इतनी बड़ी सजा भुगतनी होती है
बोलो न माँ ???
किस तरह बताऊं
क्या क्या हुआ मेरे साथ ।
अब तो भगवान से यही
प्रार्थना करती हूं कि
कभी किसी को बेटी मत बनाना
यहाँ हर कोई
भोग का सामान ही तो
समझता है न बेटियों को ।
कहाँ गए बेटी बचाओ के नारे
बड़े बड़े बेनर देख
डर लगता है अबतो
आखिर कब तक
होती रहेंगी हम,
दरिंदगी का शिकार
कब तक
परमात्मा भी मौन क्यू है माँ
बताओ न
अपराध क्या है हमारा
अब नही आना
तेरी दुनियाँ में दोबारा माँ ।
अच्छा किया जो
कत्ल कर दिया मेरा
वरना कब तलक
करती रहती
नर्क की यात्रा
ठीक ही किया न माँ
आज़ाद कर दिया
बेटी होने का
पुरुस्कार देकर सदा के लिए ।
अनिल जैन उपहार
Saturday, May 5, 2018
Friday, May 4, 2018
मुक्तक(प्यास)
मैं तो दरिया हूँ समंदर की आस रखता हूँ ।
भीगी पलकें हैं मगर लब पे प्यास रखता हूँ
एक मुद्दत हुई देखा न जिसको आंखों ने
मैं उसी खास का अहसास पास रखता हूँ
अनिल जैन उपहार
Wednesday, May 2, 2018
कला जीवन की (कविता)
बदलते हुए हालात
और
ढलते हुए यौवन की
मानिंद
बेज़ार होती जीवन की
अंतहीन यात्रा
थकने भी तो नही देती ।
रोज़ भागती सांसे
तेज़ रफ़्तार से ,
तिरस्कार की
बोझिल होती पगडंडी
फिर भी उड़े जा रहा है
मन का पंछी
किसी आसमा की तलाश में ,
शायद जीवन जीने की
यही तो कला है ।।।।।।
अनिल जैन उपहार