Tuesday, December 2, 2025

मुक्तक

जुगनू बन के रहे चमकते सूरज को आंख दिखाते है ।
चुल्लू भर पानी नहीं जिनको सागर को चिढ़ाते है।
आंगन की तुलसी का तो सम्मान नहीं कर पाए वो,
इतिहास बदल देने का झूठा सपना रोज दिखाते है।

डॉ अनिल जैन उपहार

Thursday, November 27, 2025

कविता मनुष्य भव

स्वार्थ की दहलीज पर
नहीं जलते है दीप
चाहत की बाती से।
पल पल छोटी होती
अपनेपन की चादर
समेट लेती है 
जीवन का कुहासा
किसी हारे हुए
पथिक की तरह।
उम्मीदें दम तोड़ देती है
तवायफ के घुंघरू की तरह
बदहवास रिश्तों की पायल 
खो चुकी है सारे स्वर
शायद यही है मनुष्य भव की
दुर्दशा।।।।।।

डॉ अनिल जैन उपहार

Monday, November 3, 2025

गीत

मेरे गीतों को स्वर अपने देदो प्रिए 
मन की वीणा कभी फिर बजे न बजे।
प्रीत का फिर घरौंदा सजाओ शुभे वंदन वारे कभी फिर सजे न सजे।

मैने पूजा तुम्हे देवता मानकर अर्घ्य गीतों के अबतक चढ़ाता रहा।
मन के दीपक में सांसों की बाती लिए नेह की ज्योत अबतक जलाता रहा।
भावना के जो रख लो अधर पर कलश,
मन के मंदिर में दीपक जले ना जले।

मैं अंधेरों से लड़ता रहा उम्र भर 
और उजाले मुझे ढूंढ ते ही फिरे।
वो मेरे स्वप्न में कल भी आया था पर स्मृति के पटल पर थे बादल घिरे।
ये अंधेरों की चादर समेटो प्रिए 
मन के मंदिर में दीपक जले ना जले।

प्रीत की झील में फिर खिले है कमल
मन का उपहार है जो लिखी ये गजल।
गेसुओं का ये पर्दा हटाओ प्रिए 
मद भर ये नयन फिर मिले ना मिले।

ज्योत जब भी जली नेह के दीप की
आंधियां ग़म की उसको बुझाती रही।
मैं पुजारी हुआ रस्म ऐसी रही मेरी पूजा तुम्हे नित बुलाती रही।
वंदना में अब हाथों को जुड़ जाने दो
अर्चना के ये दीपक जले ना जले।

Saturday, November 1, 2025

गीत

एक गीत आपकी अदालत में 
,,,,,,

मैं उड़ना चाहता हूं पंख को परवाज़ देना तुम।
मेरे हर गीत को अपनी मधुर आवाज देना तुम।

लगे गर वक्त जब छलने मेरा आधार बनना तुम।
मेरे सूने से जीवन का हंसी संसार बनना तुम।
विरह के गीत गाऊ तो सुरीला साज देना तुम।
मेरे हर गीत को अपनी मधुर आवाज़ देना तुम।

कली तुमको लिखा मैने तो भंवरा जल गया मुझसे।
तुम्हे मैं ज्योत लिख बैठा पतंगा अड गया मुझसे।
लिखे जो ख़त तुम्हे मैने न उनका राज़ देना तुम।
मेरे हर गीत को अपनी मधुर आवाज़ देना तुम।

सृजन की तुम हो उपमाएं तुम्ही अनुप्रास जीवन का।
तुम्ही नवगीत हो मेरा तुम्ही हर छंद यौवन का।
चढ़ाऊं अर्घ्य शब्दों के नया अंदाज़ देना तुम।
मेरे हर गीत को अपनी मधुर आवाज़ देना तुम।

डॉ अनिल जैन उपहार

Saturday, July 5, 2025

मेरे बहुत अच्छे मित्र एवं एंकर समी भाई।।।।

चिकित्सालय पिड़ावा के साथी मित्र

अस्पताल पिड़ावा के साथी

अस्पताल स्टाफ पिड़ावा द्वारा सम्मान

पूरा स्टाफ मिडिल स्कूल पिड़ावा

मिडिल स्कूल के स्टाफ साथी द्वारा सम्मान

स्मार्ट किड्ज का स्टाफ

स्मार्ट किड्ज की संस्था प्रधान यास्मीन शकील द्वारा सम्मान।।।

स्मार्ट किड्ज स्कूल द्वारा सम्मान।।।।

मेरे मित्र प्रकाश जी जैन अध्यापक द्वारा सम्मान

विद्यालय की प्रिंसिपल द्वारा सेवानिवृत्ति आदेश और विदाई पत्र प्रदान किया गया।

स्टाफ के साथी वीरेंद्र जी द्वारा सम्मान

सेवा निवृत्ति दिनांक 30जून 2025 को शाला परिवार द्वारा सम्मान।।।

Tuesday, June 10, 2025

सोनम रघुवंशी कांड

सिर्फ वासना की खातिर चाल कुटिल चली तुमने।

सप्तपदी को किया कलंकित ये कैसी चुनी गली तुमने।

मां से बेटा दूर किया कोख भी लज्जित कर डाली,

हाथों की मेहंदी शर्मसार है ऐसी कालिख मली तुमने।

डॉ अनिल जैन उपहार

Tuesday, June 3, 2025

मुक्तक

ऐसा नहीं कि जटिल प्रश्न आए नहीं हमें।
वो लाभ हानि जिंदगी के भाए नहीं हमें।
 रहे बोझ जिम्मेदारियों का उठाते तमाम उम्र,
शोक भी अपने खूब थे पर भाए नहीं हमें।

डा अनिल जैन उपहार

Thursday, May 15, 2025

जिसने सिंदूर बचाने को सिंदूर दाव पर लगा दिया।शौर्य और साहस के दम पर शत्रु को मजा चखा दिया।वो भारत की बेटी है ना अधर्मी नीच कमीनों की,आतंकी की बहन बोल जननी पर दाग लगा दिया।डा अनिल जैन उपहार

बदजुबानी की हदें सब तोड़ दी तुमने।
परवरिश कैसी रही धारा मोड दी तुमने।
सोफिया को आतंकी की बहन बताने वाले सुन,
संस्कारों की विरासत क्यों छोड़ दी तुमने।।

डा अनिल जैन उपहार

सेना पर टिप्पणी

 सिंदूर बचाने को सिंदूर दाव पर लगा दिया।

शौर्य और साहस के दम पर शत्रु को मजा चखा दिया।

वो भारत की बेटी है ना अधर्मी नीच कमीनों की,

आतंकी की बहन बोल जननी पर दाग लगा दिया।


डा अनिल जैन उपहार

सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी

बदजुबानी की हदें सब तोड़ दी तुमने।
परवरिश कैसी रही धारा मोड दी तुमने।
सोफिया को आतंकी की बहन बताने वाले सुन,
संस्कारों की विरासत क्यों छोड़ दी तुमने।।

डा अनिल जैन उपहार

Thursday, May 8, 2025

पहलगांव हमला

सुनो प्रारब्ध है यह तो अभी अंजाम देखोगे।

छप्पन इंची सीने का नया पैगाम देखोगे।

उरी हो या हो पुलवामा सबक हर बार सिखलाया,

हमारा धर्म देखोगे हमारा काम देखोगे।

डा अनिल जैन उपहार

Thursday, March 20, 2025

न्यायालय के फैसले पर(मुक्तक)

माना न्यायपालिका पर खूब भरोसा करते सब।
तल्ख टिप्पणियों पर अपराधी  औंधे मुंह गिर जाते तब।
ये कैसी परिभाषा गढ़ दी तुमने अपने फैसले की,
कैसे न्याय दिलाओगे इस बचकानी सोच से अब।

Thursday, March 13, 2025

कविता (विवशता(

विवशता
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जिंदगी की जंग में 
हर बार मर जाती है
आत्मा
हार जाता है आदमी
अपना अस्तित्व बचाने की
लाचारी में ,
कल्पना के पंख 
लगते है निगलने 
वजूद के अवशेष।
अरमानों के शिखर
चढ़ जाते है भेंट
अति आधुनिकता की होड़ में।
विवश हृदय 
हर बार घरौंदे को बचाने की
जुगत में पी जाता है 
लहू के घूंट
और बिखरे हुए तिनकों को
एक जुट करने की
जद्दोजहद में ,
करने लगता है अपनी सांसों की
टूटती गति से 
जड़वत होते रिश्तों में
प्राण फूंकने की 
असफल कोशिश ।
लेकिन अपनापन बौना हो
कर देता है समर्पण
देह की असीमित परिधि में,
नया पाने की चाह और पुराना
छोड़ देने की होड़ में खुद कों ।
आँगन में खड़ा बुढा बरगद
लाचार हो देख रहा है 
आँगन से अपनी विदाई का
मुहूर्त।।।।।

डॉ अनिल जैन उपहार

Wednesday, January 1, 2025

एक अंदाज यह भी संचालन का

गीत का अंदाज

यादगार पल

कविता का सम्मान

शानदार संचालन

कल्याणपुरा कवि सम्मेलन

नूतन वर्ष की अगवानी

कितना खोया कितना पाया व्यर्थ रहे सवाल।

चिंतन ने सीमाएं लांघी,उपजे खूब बवाल।

युग देहरी पर अभिनंदित हो सृजन और  शब्द माल 

नूतन वर्ष की अगवानी हो समृद्ध रहे यह साल।

डा अनिल जैन उपहार