Monday, May 29, 2023

संदेश (प्रेयसी के नाम)

इंसानियत की अंगूठी में
पवित्रता का मोती है प्रेम।
आज कल न जाने क्यूं
द्वार  देहरी से रूठा हुआ 
अलगाव की भाषा बोल 
देहरी के दीप को 
चिढ़ाने लगा है।
सादगी की वीणा पर,
सृजन, सात्विकता के संगीत को छोड़
विरह के गीत गाने लगा है,
मर्यादा का शिखर
अपने अस्तित्व को बचाने के
सारे प्रयास धूमिल कर चुका है
ऐसे में फिर भी उम्मीद की
सियाही
लिख रही है संदेश
अपनी प्रेयसी के नाम।

डा अनिल जैन उपहार

Saturday, May 27, 2023

कवितासमय के साथ बदलतारिश्तों का व्याकरण,अर्थ की भूख से व्याकुलनेह की मिठास,स्वच्छंद जीने की चाहत मेंदम तोड़ती बूढ़ी बैसाखीझुर्रियों में कैदउम्मीद का हँसी सावनऔर उस पर अति आधुनिकता कीमुहरकोई कैसे लिखे तहरीरउस दर्द की जो सहा था एक आशा की किरण नेजो थामेगा उंगली औरदेगा सहारा बूरे वक्त मेंताक रहा है बेबस,लाचारअसहज बूढ़ा होता मन।किसी बैसाखी की तलाश में।।।।डा अनिल जैन उपहार

दम तोड़ती प्रतीक्षा में
उम्मीद की सांसे,
व्याकुल हो निहारती
अनागत की कोई आहट।
हर बार हार और जीत के
बेमेल खेल में 
संघर्ष की दास्तां
आखिर कब तक 
लिखे कोई।
शायद यही है नियति उसकी
क्योंकि औरत जो है वो।।।।

डा अनिल जैन उपहार

लाचारी

दम तोड़ती प्रतीक्षा में
उम्मीद की सांसे,
व्याकुल हो निहारती
अनागत की कोई आहट।
हर बार हार और जीत के
बेमेल खेल में 
संघर्ष की दास्तां
आखिर कब तक 
लिखे कोई।
शायद यही है नियति उसकी
क्योंकि औरत जो है वो।।।।

डा अनिल जैन उपहार

भौतिकता

दम तोड़ती प्रतीक्षा में
उम्मीद की सांसे,
व्याकुल हो निहारती
अनागत की कोई आहट।
हर बार हार और जीत के
बेमेल खेल में 
संघर्ष की दास्तां
आखिर कब तक 
लिखे कोई।
शायद यही है नियति उसकी
क्योंकि औरत जो है वो।।।।

डा अनिल जैन उपहार