Sunday, December 23, 2018
Friday, December 21, 2018
अगवानी(कविता)
गुज़रे महीनों और
दिनों का
सारा लेखा जोखा
दर किनार करते है,
आओ फिर से समपर्ण
की स्याही से
संबंधों के शिलालेख पर
हस्ताक्षर करते है ।
और करते है अगवानी
नूतन वर्ष की ।
प्रश्न चिन्हों के अंतिम अर्घ्य से
विदाई इस गुज़रे साल की ।
अनिल जैन उपहार
Tuesday, December 4, 2018
नारी तुम सम्पूर्ण हो(कविता)
महानता का
बोझ
कभी लड़खड़ाने
नही देता ,
और न कभी होने देता है
अदना
शायद इन्हीं के बीच
तुमने सीख लिया है
अपनों के साथ
विलय होजाने की कला।
तभी तो देवत्व
तुम्हारे कदमो में नर्तन कर
तुम्हे और भी ऊँचा उठा देता है
मनुष्य बिरादरी
और उसकी मानसिकता से ,
सहजना और समेट लेना
सारा दर्द अपने भीतर
यही है खूबी नारी होने की ।
और हां सम्पूर्ण नारी
तुम्ही तो हो।।।।।।।
अनिल जैन उपहार
Subscribe to:
Posts (Atom)