Monday, June 19, 2017

कविता(चुनोती)

भले ही वक़्त से लड़ना सीख लिया तुमने
गरल तन्हाई का
पीना भी
सीख लिया तुमने ।
जटिल प्रश्न
पल भर में हल कर गए
शिकस्त जब भी मिली
खुद अश्क पिये
और ज़ख्मों को
चुपचाप सिल गए ।
यह शिल्प कहाँ से लाए तुम
हर शाख इस कारीगरी से
हैरान है ,
शायद दर्द पल भर का
मेहमान है ।

अनिल जैन उपहार

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