मै समर्पण लिखूं अहसास बन तू ढल जाना ।
दिल के सागर में तू दरिया सी बन मचल जाना ।
मेरी सांसों में समाया है तू धड़कन बन कर
चाहे बदले ये ज़माना न तुम बदल जाना । अनिल जैन उपहार
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