Monday, August 31, 2020

मुक्तक(सागर)

जज़्बातों के सागर में, होले से कंकर मार गया ।

वो सदियों की प्यास लिये, फिर दरिया के पार गया ।

झील सी गहरी आंखों में ,क्या अज़ब गज़ब गहराई थी

डूबने वाला ऐसे डूबा ,आर गया ना पार गया ।

डॉ अनिल जैन उपहार

No comments:

Post a Comment