: तेरे हरेक फरेब पर अफसाना लिख दिया ।
जो ज़ख्म खाये तुमसे तो दीवाना लिख दिया ।
कैसा अज़ब दस्तूर है जालिम इस जहाँ का
रिश्तों की भीड़ में मुझे बेगाना लिख दिया । -
------अनिल उपहार
जो ज़ख्म खाये तुमसे तो दीवाना लिख दिया ।
कैसा अज़ब दस्तूर है जालिम इस जहाँ का
रिश्तों की भीड़ में मुझे बेगाना लिख दिया । -
------अनिल उपहार
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