हादसों से ही सदा मैं तो पला हूँ ।
राह में अक्सर अकेला ही चला हूँ
ठोकरे खाई बहुत अपनों के हाथो
तुम्हे दिल के किस्से सुनाने चला हूँ।
अनिल उपहार
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