दर्द तो जाता रहा अब ना रहा कोई गिला ।
अश्क आँखों ने पिये थे जख़्म भी खुद ही सिला ।
वक़्त की आंधी में फिर भी दीप सा लड़ता रहा
आपके इस प्यार से ही हौंसला हमको मिला ।
अनिल उपहार
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