Thursday, April 20, 2017

मुक्तक

तुझसे तकरार भी करूँ तो मैं करूँ कैसे ।

तुझपे ऐतबार भी करूँ तो मैं करूँ कैसे ।

वक़्त की ठोकरों से टूटना तो लाज़िम था

तुझसे इज़हार  भी करूँ तो मैं करूँ कैसे ।

अनिल जैन उपहार

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