दुआओ से बडा कोई खजाना नही ।
अश्कों को पलकों पर सजाना नहीं ।
रिश्ते भी देखो पूर्ण विराम से हुए
अब भरोसे के लायक जमाना नहीं ।
------------अनिल उपहार -----
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