Saturday, May 6, 2017

चिठ्ठी (यादें)

देह की हर दस्तक में
घोल रही है मिठास
जीवन जल उलीचती
तुम्हारी यादें ।
उस प्रथम चिठ्ठी की तरह
जिसका हर्फ़ हर्फ़
महक रहा है आज भी
तुम्हारी खुशबू से ।

अनिल जैन उपहार

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