Tuesday, May 2, 2017

मुक्तक(राजे उल्फत)

राजे उल्फत को अपने दिल में छुपाये रखिये ।

ये सफर है इसे कदमों से मिलाये रखिये ।

वक़्त की धूप में जलना तो अपना लाज़िम था

अपने आँचल को ज़माने से बचाये रखिये ।

अनिल जैन उपहार

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