Thursday, September 30, 2021

मुक्तक(सिर्फ तुम)

जब जब मैं लिखने बैठू, तुम आकर लिखवा जाते हो।

मेरे मौन स्वरों को अपने मीठे स्वर दे जाते हो ।

गीत तुम्हारे शब्द तुम्हारे मैं तो वाचक अदना सा,

कौन हो तुम हर वक़्त हृदय की सारी पीड़ा हर जाते हो।

डॉ अनिल जैन उपहार

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