Friday, March 25, 2022

मुक्तक धड़कनों की पालकी से

धडकनोँ की पालकी से हर बार मन तुमकोँ निहारे ।

गीत,कविता,छन्द,ही क्या खुद गजल तुमको सँवारे ।

नेह निमंत्रण तुमको है नव गीत अधरों पर धरो,

जीवन के रेखा चित्रोँ मेँ आकर बासंती रंग भरो ।

,,,mere geet ka mukhda ,डॉ अनिलuphar,copy राइट

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