Friday, June 28, 2024

अधूरा है गीत बिन तुम्हारे(गीतिका)

शब्दों के सागर को मन जब जब खंगाल ने लगा 
हर बार तेरा ही अक्स उभर आया ।
कभी  कविता, कभी गजल ,तो कभी 
छंदों की पायल में ,
तुम्हें ही खनकता पाया ।

मेरे ये गीत मेरे नहीं 
तेरे विश्वास का कोमल अहसास है ।

तन भले ही हो पराया पर मन तुम्हारे पास है।

तभी तो मेरे अधरों पर आज भी 
स्वर तुम्हारे गूंजते है ।
दर्द तो बस गीत रचता है 
तू ही तो है जो हर गीत में बसता है ।

बिन तुम्हारे संकलन आज तक अधुरा है 
न कविता ही पूरी हो सकी, न गीत ही हुआ पूरा है ।

Anil uphar @copy-राइट---------------------

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