Wednesday, January 1, 2025

नूतन वर्ष की अगवानी

कितना खोया कितना पाया व्यर्थ रहे सवाल।

चिंतन ने सीमाएं लांघी,उपजे खूब बवाल।

युग देहरी पर अभिनंदित हो सृजन और  शब्द माल 

नूतन वर्ष की अगवानी हो समृद्ध रहे यह साल।

डा अनिल जैन उपहार

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