लगी अपने दिल की बुझाने चला हूँ ।
तुम्हें हाले दिल मैं सुनाने चला हूँ ।
जुदाई के लम्हे वो फुरकत की रातें
तुम्हे दिल के किस्से सुनाने चला हूँ।
अनिल उपहार
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