कौन कहता है कि
सिर्फ सुसराल में ही
होती है सास,ननद,देवर
मायके में भी होती है
सास,ननद,देवर
जो करते रहते है
बात बात पर टोका टोकी,
जिस दिन होती है
घर मे शांति तो-
मुहल्लेवाले समझ जाते है
खुद ब खुद
कि यातो बेटियाँ ब्याह दी गयी है
या फिर भेज दी गयी है
लंबी छुट्टी पर,
यह पढ़ने के लिए
कि वो पहले भी पराई थी
और आज भी है पराई
अपनी नियति को समझने ।
डॉ अनिल जैन उपहार
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