Sunday, July 26, 2020

गीत मैं उड़ना चाहता हूं

उड़ना चाहता हूं पंख को परवाज़ देना तुम
मेरे हर गीत को अपनी प्रिये आवाज देना तुम।

लगे गर वक़्त जब छलने मेरा आधार बनना तुम।
मेरे सुने से जीवन का हँसी संसार बनना तुम।
विरह के गीत गाऊ तो सुरीला साज देना तुम।

कली तुमको लिखा मैने तो भंवरा जल गया मुझसे।
तुम्हे मैं ज्योत लिख बैठा पतंगा अड़ गया मुझसे।
लिखे जो ख़त तुम्हें मैंने न उनका राज़ देना तुम।
सृजन की तुम हो उपमाएं तुम्ही अनुप्रास जीवन का।
तुम्ही नवगीत हो मेरा तुम्ही हर छंद यौवन का।
सरकते सर से आँचल को वही मुमताज़ देना तुम।

हुआ रोशन तुम्ही से ये हिमाला मेरी शौहरत का।
तुम्ही दिनमान हो मेरी कविता के मुहूरत का।
चढ़ाऊँ अर्घ शब्दों के नया अंदाज़ देना तुम ।
मेरे हर गीत को अपनी मधुर आवाज देना तुम।

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