Sunday, August 16, 2020

दिल कहता है (गीत)

दिल कहता है गीत सुनाऊ आ तुझको मन का मीत बनाऊ।
रिश्तों का उपमान बदलकर अलंकार से रीत बनाऊ।
माना छंद बना है जीवन चलन ज़माने का गहरा है।
आस अधूरी रही मिलन की उम्मीदों पर भी पहरा है।
मन देहरी पर अक्षत धर कर खूब करू मनुहार मनाऊ।
हृदय पटल पर शब्द धरु में सचमुच ऐसी प्रीत निभाऊं।
मन से मन का मिलन करा दे ऐसा कोई गीत सुनाऊ।

दर्द भी चुप अधरों से बोले नयनों के सब मौन इशारे।
कैसे कब तक राह निहारे ये सावन की मस्त फुहारें ।
आजाओ अब नेह पुकारे तुझको मितवा मीत पुकारे।
छंद तुम्ही नवगीत तुम्ही तुमसे ही हर बन्ध सजा रे।

डॉ अनिल जैन उपहार

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